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शिवावतार भगवत्पाद आदि शंकराचार्य

कलियुग प्रारंभ होने पर कलिपुरुष द्वारा ग्रसित सनातन वैदिक आर्य हिंदू धर्म की पुनर्प्रतिष्ठा, राजगद्दी और व्यासगद्दी का शोधन, भारत के देवत्व को पुनः प्रकट करने वाले शिवावतार भगवत्पाद आदि शंकराचार्य महाभाग का प्राकट्य वैशाख शुक्ल पञ्चमी युधिष्ठर संवत् 2631 (507 ईसा पूर्व) को कालडी नामक ग्राम केरल में हुआ था।
जब नास्तिकता अपने चरम पर थी। राजा-महाराजा से लेकर आम जनमानस तक सब कोई नास्तिकता और पाखंडवाद में जकड़ गया था, उस काल में वैदिक आर्य हिंदू धर्म को आश्रय देने के लिये ऐसे विराट वैदिकधर्म भास्कर के रूप में भगवान आद्यशंकराचार्य ऐसे प्रकट हुये कि पाखंडवाद और नास्तिकता का तमस संपूर्ण भारत से समूल नाश हो गया और चतुर्दिक सत्य सनातन वैदिक आर्य हिंदू धर्म की पुनर्प्रतिष्ठा हुयी।
