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आचार्य शंकर भारत उद्भासक मंडल

आचार्य शंकर भारत उद्भासक मंडल

केंद्रीय कार्यालय लखनऊ

शिवावतार भगवत्पाद आदि शंकराचार्य

[ यतो धर्मस्य ततो जयः ]

आचार्य शंकर
भारत उद्भासक
मंडल

आदिशंकराचार्य के आदर्श पर सनातन धर्म का शास्त्रीय उद्भासन · लखनऊ

01 / 03

शिवावतार भगवत्पाद आदि शंकराचार्य

[ शंकरवाणी ]

शंकरवाणी

शास्त्र-सम्मत लेख — प्रत्येक लेख में शीर्षक, लेखक और चित्र। मण्डल की वाणी को प्रभावी रूप से पढ़ें।

स्वधर्मे निधनं श्रेयः — वर्णाश्रम धर्म की जागृति

2026-03-12

स्वधर्मे निधनं श्रेयः — वर्णाश्रम धर्म की जागृति

आचार्य शंकर भारत उद्भासक मंडल

अपने अधिकार और विधान की सीमा में ही धर्माचार कल्याण-प्रद सिद्ध होता है। परमात्मा श्रीकृष्ण गीता में कहते हैं — स्वधर्मे निधनं श्रेयः।

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आदिशंकराचार्य — भारत के देवत्व का पुनः प्रकट

2026-02-28

आदिशंकराचार्य — भारत के देवत्व का पुनः प्रकट

शंकरवाणी संपादकीय

कलियुग में जब नास्तिकता चरम पर थी, तब शिवावतार भगवत्पाद आदिशंकराचार्य वैदिकधर्म भास्कर के रूप में प्रकट हुए।

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[ परिचय · UNIT / INTRO ]

मण्डल
परिचय

सत्य सनातन वैदिक आर्य हिन्दू धर्म के शास्त्रोक्त यथारूप का प्रचार — भगवत्पाद आदिशंकराचार्य के आदर्श पर।

आचार्य शंकर भारत उद्भासक मण्डल भगवान शिवावतार भगवत्पाद आदिशंकराचार्य भगवान को अपना आदर्श स्वीकार कर सत्य सनातन वैदिक आर्य हिन्दू धर्म के सम्यक व समग्र उत्थान सहित समस्त हिन्दु समाज एवं हिन्दुराष्ट्र भारतवर्ष के कल्याण के मार्ग को प्रशस्त करने को संकल्पबद्ध एक संगठनात्मक संस्था है। उपर्युक्त संकल्प की पूर्ति हेतु यह संस्था, अपने परम पवित्र हिन्दु धर्म के श्रुति-स्मृति सम्मत शास्त्रोक्त यथारूप का प्रचार-प्रसार करने में तत्पर है। हिन्दू धर्म के शास्त्रीय स्वरूप को उद्भासित करने के क्रम में अपना मण्डल, समस्त सनातन धर्मी हिन्दुओं के मानस में स्वधर्म बोध, अपने दैनन्दिन जीवन में उसके निष्ठापूर्वक पालन, पूजा-उपासना-भक्ति-कर्मकाण्ड-आहार-विहार-संस्कार-वेशभूषा सहित जीवन के विविध पक्षों के सम्बन्ध में शास्त्र सम्मत जागरूकता उत्पन्न करने का कार्य कर रहा है।

हमारे आदर्श

शिवावतार भगवत्पाद आदि शंकराचार्य

शिवावतार भगवत्पाद आदि शंकराचार्य

कलियुग प्रारंभ होने पर कलिपुरुष द्वारा ग्रसित सनातन वैदिक आर्य हिंदू धर्म की पुनर्प्रतिष्ठा, राजगद्दी और व्यासगद्दी का शोधन, भारत के देवत्व को पुनः प्रकट करने वाले शिवावतार भगवत्पाद आदि शंकराचार्य महाभाग का प्राकट्य वैशाख शुक्ल पञ्चमी युधिष्ठर संवत् 2631 (507 ईसा पूर्व) को कालडी नामक ग्राम केरल में हुआ था। जब नास्तिकता अपने चरम पर थी। राजा-महाराजा से लेकर आम जनमानस तक सब कोई नास्तिकता और पाखंडवाद में जकड़ गया था, उस काल में वैदिक आर्य हिंदू धर्म को आश्रय देने के लिये ऐसे विराट वैदिकधर्म भास्कर के रूप में भगवान आद्यशंकराचार्य ऐसे प्रकट हुये कि पाखंडवाद और नास्तिकता का तमस संपूर्ण भारत से समूल नाश हो गया और चतुर्दिक सत्य सनातन वैदिक आर्य हिंदू धर्म की पुनर्प्रतिष्ठा हुयी।
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[ दिव्य यात्रा · DIGVIJAYA ]

शंकर की
दिव्य यात्रा

ब्रह्म सत्यं जगन्मिथ्या जीवो ब्रह्मैव नापरः

भगवत्पाद आदिशंकराचार्य की जीवन-यात्रा — कलडि से केदारनाथ तक — केवल एक महापुरुष की कथा नहीं; सनातन धर्म के पुनरुत्थान का दिव्य आख्यान है। सात पड़ावों में वह प्रकाशमय पथ।

  1. कालाड़ी — दिव्य जन्म०१ · कालाड़ी
    ८वीं शताब्दी

    केरल · जन्मभूमि

    कालाड़ी

    दिव्य जन्म

    केरल की पवित्र भूमि कालाड़ी में भगवत्पाद आदिशंकराचार्य का अवतरण हुआ — वह ज्योति जिसने अद्वैत वेदान्त की ज्योतिर्मय धारा जगाई। माँ आर्यम्बा और शिवगुरु के घर में जन्मा यह बालक बाल्यावस्था में ही शास्त्रों का सागर था।

  2. नर्मदा — गुरु की शरण०२ · नर्मदा
    संन्यास

    मध्य भारत · दीक्षा

    नर्मदा

    गुरु की शरण

    नर्मदा के पावन तट पर गोविन्द भगवत्पाद से संन्यास दीक्षा ग्रहण कर उन्होंने संसार को त्याग दिया। यहाँ से आरम्भ हुई वह यात्रा जो ज्ञान के लिए नहीं — ज्ञान को जगाने के लिए थी।

  3. काशी — अद्वैत की घोषणा०३ · काशी
    प्रवचन

    उत्तर प्रदेश · ज्ञानपीठ

    काशी

    अद्वैत की घोषणा

    काशी की पवित्र गलियों में उन्होंने अद्वैत का सिंहनाद किया — एक ही परम सत्य, अनेक रूपों में। मण्डन मिश्र जैसे महान् विद्वानों से शास्त्रार्थ कर उन्होंने वेदान्त की प्रतिष्ठा पुनः स्थापित की।

  4. बद्रीनाथ — शास्त्र का प्रकाश०४ · बद्रीनाथ
    ग्रन्थ रचना

    हिमालय · भाष्यभूमि

    बद्रीनाथ

    शास्त्र का प्रकाश

    हिमालय की शान्ति में ब्रह्मसूत्र भाष्य, गीता भाष्य और उपनिषद् भाष्य रचे गए। कठिन शिखरों पर बैठकर उन्होंने वेद-वाणी को सरल और शाश्वत भाषा दी — जो आज भी संसार को प्रकाशित करती है।

  5. श्रृंगेरी — धर्म की नींव०५ · श्रृंगेरी
    पीठ स्थापना

    कर्नाटक · दक्षिणाम्नाय

    श्रृंगेरी

    धर्म की नींव

    श्रृंगेरी में दक्षिणाम्नाय शारदा पीठ की स्थापना कर उन्होंने सनातन धर्म को संस्थागत रूप दिया। चार दिशाओं में चार आम्नाय मठ — ताकि ज्ञान की ज्योति कभी बुझे नहीं।

  6. दिग्विजय — भारत का परिक्रमण०६ · दिग्विजय
    यात्रा

    भारतवर्ष · चार दिशायें

    दिग्विजय

    भारत का परिक्रमण

    द्वारका से जगन्नाथ पुरी, ज्योतिर्मठ से कन्याकुमारी — उन्होंने समूचे भारतवर्ष का दिग्विजय किया। प्रत्येक स्थान पर शास्त्र, भक्ति और एकता का बीज बोया। यह यात्रा केवल भूगोल की नहीं — चेतना की थी।

  7. केदारनाथ — अनन्त में विलीन०७ · केदारनाथ
    परम गमन

    उत्तराखण्ड · समाधि

    केदारनाथ

    अनन्त में विलीन

    केदारनाथ की दिव्य हिम-शान्ति में भगवत्पाद ने देहत्याग कर परमब्रह्म में लीन हो गए। शरीर समाप्त हुआ — पर उनकी वाणी, उनके पीठ और उनका अद्वैत आज भी जीवित हैं।

[ स्मरण ]

शंकरं शङ्कराचार्यं केशवं बादरायणम्। सूत्रभाष्यकृतौ वन्दे भगवन्तौ पुनः पुनः॥

उनकी यात्रा समाप्त हुई — पर उनका प्रकाश अनन्त है। हम उसी ज्योति के आदर्श पर चलते हैं।

[ प्रकल्प ]

मंडल के आगामी प्रकल्प

सहयोग करने हेतु
सुरभि मन्दिरं प्रकल्प

प्रकल्प / 01

सुरभि मन्दिरं प्रकल्प

सुरजापुर (पाण्डेय पुरवा), मनकापुर, गोंडा में परिकल्पित गौसेवा परियोजना — गौशाला, निराश्रित गौ आश्रय, गौ चिकित्सा केंद्र एवं भगवती सुरभि मंदिर।

आचार्यशंकर वैदिकविद्या संस्थान, मोहम्मदी (खीरी)

प्रकल्प / 02

आचार्यशंकर वैदिकविद्या संस्थान, मोहम्मदी (खीरी)

शिवलोकवासी श्रीराम अवस्थी जी की पुण्य स्मृति में संचालित गुरुकुल — वैदिक वाङ्मय एवं आधुनिक विद्या का समन्वय।

[ हमारे प्रेरणास्रोत ]

हमारे प्रेरणास्रोत

धर्मसम्राट स्वामी श्रीकरपात्री जी महाभाग

प्रेरणास्रोत

धर्मसम्राट स्वामी श्रीकरपात्री जी महाभाग

भगवत्पाद आद्यगुरु शङ्कराचार्य भगवान के जन्म के 2414 वर्ष बाद 19 वीं शताब्दी में अभिनवशङ्कर पदवाक्यप्रमाण पारावारीण, अष्टांग योगनिष्ठ विश्वविश्रुत महामनीषी। कर (हाथ) ही जिनके भोजन लेने का पात्र हैं — आजीवन एक वस्त्रधारी, गंगाजलसेवी, आजीवन धनस्पर्श किये बिना धर्म का प्रचार प्रसार करने वाले।

पूज्य आचार्य श्रीरामशंकर शुक्ल

प्रमुख संरक्षक

पूज्य आचार्य श्रीरामशंकर शुक्ल

आप पूज्यपाद धर्मसम्राट स्वामीश्री करपात्रीजी महाराज के शिष्य और पूज्यपाद श्रीमज्जगदगुरु पुरी पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामीश्री निश्चलानंद सरस्वती जी महाराज महाभाग के विशेषकृपापात्र हैं।

श्री आशुतोष वाजपेई जी

विद्वतवरिष्ठ

श्री आशुतोष वाजपेई जी

[ नेतृत्व ]

मुख्य कार्यपालक एवं मार्गदर्शक

पूज्य स्वामिश्री सिद्धेश्वरानंद गिरी जी महाराज

मुख्य कार्यपालक अधिकारी · संरक्षक

पूज्य स्वामिश्री सिद्धेश्वरानंद गिरी जी महाराज

आप पूज्य महंत (श्रीनीलकंठेश्वर महादेव-वैष्णव माता मंदिर, संत आश्रम महानगर, लखनऊ) हैं। आपने परंपरागत शास्त्रों के अध्ययन उपरांत जूना अखाड़े से संन्यास ग्रहण कर वर्तमान में पूज्य महंत हैं। आप मण्डल के संरक्षक और मुख्य कार्यपालक अधिकारी हैं।

आदरणीय श्री रामबाबू पांडेय जी

प्रमुख मार्गदर्शक

आदरणीय श्री रामबाबू पांडेय जी

आप पुरीपीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामीश्री निश्चलानंद सरस्वती जी महाराज के दीक्षित शिष्य हैं। आप साधक, लेखक और विचारक हैं। धर्म-अध्यात्म, संस्कृति और राष्ट्र के संदर्भ में आपका गहन अध्ययन और चिंतन है। आप मण्डल के प्रमुखमार्गदर्शक हैं।

[ ध्येय ]

ध्येय

आचार्यशंकर भारतोद्भासक मण्डल भगवत्पाद आदिशंकराचार्य भगवान को प्रेरणा स्रोत मानकर शास्त्रोक्त धर्म के प्रचार प्रसार में संलग्न है। हिंदू धर्म के सभी अंगभूत घटकों पर यथारूप आस्था रखते हुये सभी के व्यवहारिक, दार्शनिक और आध्यात्मिक पहलुओं को प्रकट करने में संलग्न है। सत्य सनातन वैदिक आर्य हिंदू धर्म के शास्त्रीय स्वरूप की सर्वत्र स्थापना ही मंडल का ध्येय है। सनातन धर्म का आधार वर्णाश्रम है अतः वर्णाश्रम की मर्यादा का सर्वतोभावेन रक्षा करना मण्डल का परमकर्तव्य है। सनातन धर्म के सभी वैदिक संप्रदायों का सम्मान और सभी का समन्वय, संप्रदाय विशेष में कालक्रम से उत्पन्न विकृतियों का शमन आदि हमारा उद्देश्य है। परब्रह्म के कार्यविशेष से पाँच ब्रह्मस्वरूप देवों (श्री विष्णु, श्री शिव, श्रीदुर्गा, श्री गणेश, श्री सूर्य) में समान आस्था और उनकी भक्ति का प्रचार प्रसार करना भी हमारा ध्येय है।

[ मंडल की संपूर्ण कार्यकारिणी ]

मंडल की संपूर्ण
कार्यकारिणी

संरक्षक, मार्गदर्शक एवं कार्यकारी व्यवस्था — शास्त्रीय मार्गदर्शन में संगठनात्मक सेवा।

01

[ मुख्य कार्यपालक अधिकारी ]

पूज्य महंत सिद्धेश्वरानंद गिरी जी महाराज

पीठाधीश्वर श्रीनीलकंठेश्वर महादेव — वैष्णव माता मंदिर, संत आश्रम, महानगर · लखनऊ

02

UNIT / SRK

संरक्षक मंडल

प्रमुख

पूज्य आचार्यश्री रामशंकर शुक्ल जी

  • 01पूज्य आचार्यश्री दीनदयाल मणि त्रिपाठी जी
  • 02प्रो. अजय मिश्र जी
  • 03प्रो. राकेश द्विवेदी जी
  • 04श्रीमान पंकज झा जी
  • 05श्री अजय जोशी जी
  • 06श्री रमाकांत शुक्ल जी
  • 07श्री अनिल मिश्र 'भाई जी'
  • 08प्रो. शीला मिश्रा जी
03

UNIT / MRG

मार्गदर्शक मंडल

प्रमुख

श्री रामबाबू पाण्डेय जी

  • 01प्रो. श्यामलेश त्रिपाठी जी
  • 02प्रो. आशीष अवस्थी जी
  • 03प्रो. महेद्र अग्निहोत्री जी
  • 04प्रो. ऋषि कुमार मिश्र जी
  • 05प्रो. उत्कर्ष उपाध्याय जी
  • 06प्रो. नीरज शुक्ल जी
  • 07प्रो. मंजुला उपाध्याय जी
  • 08प्रो. संजीव त्रिवेदी जी
  • 09डॉ. रमेश त्रिपाठी जी
  • 10डॉ. जितेंद्र शुक्ल जी

कार्यकारी पटल

कार्यकारी अध्यक्ष

03
  • श्रीमान कपिल शुक्ल जी
  • श्रीमान शिवा जी तिवारी

कार्यकारी उपाध्यक्ष

04
  • श्रीमान संगम वाजपेयी जी
  • श्रीमान आशीष वाजपेयी जी
  • श्रीमान पुनीत द्विवेदी जी

महासचिव

05
  • श्रीमान निशांत वाजपेयी जी

सचिव

06
  • श्रीमान विशाल शुक्ल जी
  • श्रीमान आकाश सिंह चौहान
  • श्रीमान देव मंगलम त्रिपाठी जी
  • श्रीमान आकाश अवस्थी जी
  • श्रीमान इं. मिलिंद शुक्ल जी
  • श्रीमान सतीश जी

कोषाध्यक्ष

07
  • श्रीमान कुलदीप मिश्र जी
  • श्रीमान शशांक मोहन श्रीवास्तव जी

संपर्क प्रमुख

08
  • श्रीमान विकास तिवारी जी
  • श्रीमान विभव तिवारी जी
  • श्रीमान देवनारायण पाण्डेय जी

प्रचार विभाग

09
  • श्रीमान राहुल त्रिपाठी जी
  • श्रीमान आयुष सक्सेना जी

अभिलेख विभाग

10
  • श्रीमान सिद्धार्थ चतुर्वेदी जी

प्रकल्प प्रमुख

धर्म · रक्षा · अर्थ · सेवा · श्री · सुरभि · हनुमत · न्याय

धर्म प्रकल्प

P-01
  • श्रीमान सात्विक मिश्र जी

ज्ञान प्रकल्प

P-02
  • श्रीमान प्रभाकर शुक्ल जी

रक्षा प्रकल्प

P-03
  • श्रीमान हर्षित सिंह जी

अर्थ प्रकल्प

P-04
  • श्रीमान सिद्धार्थ मिश्र जी
  • श्रीमान संजय सिंह जी

सेवा प्रकल्प

P-05
  • श्रीमान पारस जी

श्रीप्रकल्प

P-06
  • प्रो. वंदना द्विवेदी जी

हनुमत प्रकल्प

P-07
  • श्रीमान शिवकांत भाई जी
  • श्रीमान सूरज सिंह जी

सुरभि प्रकल्प

P-08
  • श्रीमान सूर्यांश शुक्ल जी

शांकर न्याय सेना

P-09
  • श्रीमान सुदेश तिवारी जी
  • श्रीमान यशवर्धन दुबे जी

केंद्रीय सदस्य

श्रीमान सिद्धांत दीक्षित जीश्रीमान महीप अवस्थी जी

[ आगामी कार्यक्रम ]

आगामी कार्यक्रम

शिवावतार आदिशंकराचार्य प्राकट्योत्सव संगोष्ठी

2026-05-02 · लखनऊ

शिवावतार आदिशंकराचार्य प्राकट्योत्सव संगोष्ठी

प्रश्नोत्तरी एवं लेख प्रतियोगिता पुरस्कार वितरण समारोह सहित शास्त्रीय संगोष्ठी। पंजीकरण अनिवार्य।

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